ग़म की बदली में चमकता एक सितारा है, हर अंधेरे की गोद में छुपा उजियारा है।
आज जो टूटा है, बिखरा है, खो गया है, कल वही तिनका आशियाना हमारा है।
धमकी ग़ैरों की नहीं लगती हमें अब ख़ौफ, हमने तो सीखा है गिरकर उठना हर रोज़।
जब अपने भी पीछे छोड़ते हैं हाथ हमारा, तब भी दिल कहता है—रास्ता तो हमारा है।
आज नहीं, कल सही—पर वक़्त बदलेगा, सपनों का सूरज हर दुख के बाद निकलेगा।
हम उस उम्मीद की लौ हैं जो बुझती नहीं, जिसे आँधियाँ डरा नहीं पातीं, छूती नहीं।
गर्दिशें राह की हों या तक़दीर की रातें, हमने हर मोड़ पर अपने इरादे काटे हैं।
टूटी हड्डियाँ हों या दिल के घाव हों गहरे, वक़्त को सीने में बाँधकर हम फिर भी चलते हैं।
तू जो बैठा है थककर, ओ मुसाफ़िर सुन, रास्ते वही हैं, लेकिन होंसले नए चुन।
तेरे पैरों में छाले हैं, मगर दिल में आग हो, तो वक़्त भी झुकता है, जब तू जाग हो।
मंज़िलें उन्हीं को मिलती हैं जो चलना जानते हैं, जो तूफ़ानों में भी चिराग़ जलाना जानते हैं।
सफ़र लंबा है, थकावट भी लगेगी दरम्यान में, पर जो चलते रहे, वही कल इतिहास के पन्नों में।
ये क़दम थकते नहीं, हार नहीं मानते, इनकी आदत है—हर मोड़ पर उम्मीदें बुनना।
जो आज खो गया है, वो फिर मिलेगा कल, बस ज़रा और चल, ज़रा और सह, ज़रा और जल।
हम वो धाराएँ हैं जो पर्वत काट देती हैं, हम वो हवाएँ हैं जो दिशा बदल देती हैं।
हमारे इरादे, हमारे विश्वास की मिसाल हैं, हम वो लहरें हैं जो समंदर में भी राह निकालती हैं।
कभी मुश्किल आई तो आँखें नम हो गईं, पर जज़्बा न बुझा, सिर्फ़ पलकों तक रुक गया।
हमने जितने आँसू बहाए, वो मोती बन गए, और हर मोती में हमने एक सपना गढ़ लिया।
रास्ते पूछते हैं, "अब भी चलेगा क्या?" हम कहते हैं—"जब तक साँस है, तब तक चलेगा हाँ!"
समय बदलता है, ये हमने जाना है, कल वही हँसेगा जो आज मुस्कुराना जानता है।
हमने अपने पत्थर खुद ही तराशे हैं, अपने भीतर की मूर्तियों को निकालने के लिए।
हर चोट एक दस्तक थी, हर ताना इक चाबी, जो खोलती गई आत्मबल के कमरों की तिजोरी।
जो कल हमारा नहीं था, आज भी अधूरा है; पर जो सपना हमने देखा, वही तो सबसे पूरा है।
हम महलों की बात नहीं करते अभी, पर हमारा हर इरादा नींव की ईंट बन चुका है कभी।
ग़र आज खाली जेब है, तो क्या फ़िक्र करें? बदल सकते हैं हालात, खुद को क्यों ठुकराएँ?
एक बात है जो हर दास्ताँ में दर्ज हो जाए— 'हमें ख़्वाबों की कीमत पता है, इसलिए हम जग जाएँ!'
वो जो हँसते हैं, उलाहना देते हैं दूर खड़े, उन्हें क्या पता हम अपनों की चुप्पियों से कैसे लड़े।
मुस्कान ओढ़ते हैं हम तो टूटते वक़्त में भी, क्योंकि हार हमसे डरती है, और जीत कहती है—"चल अभी!"
हमने खुद को हर एक बार से भरा है, हर हार से सीखा है, खुद को सुधारा है।
कोई राह नहीं मिली तो रास्ता बना डाला, और जब रोशनी न थी, चाँदनी को ही अपना डाला।
हम वो पेड़ हैं जो सूखे मौसम में भी हरियाते हैं, हम वो दीपक हैं जो आँधियों में भी जल जाते हैं।
हमारे होंसले, हमारी उम्मीदों का चेहरा हैं, जो अंधेरे से लड़कर भी उजाले का सवेरा हैं।
ग़म की बदली जरूर घिरी है इस पल कहीं, पर उस पार देखा है हमने एक किरण वहीं।
हर साया एक समय के लिए है, जाएगा, हमारा उजाला लौटेगा और छा जाएगा।
आज जो अपना नहीं है, कल जरूर होगा, ये वादा नहीं, आत्मा का यक़ीन होगा।
हम गिरते हैं, फिर उठते हैं, फिर लड़ते हैं, हम आज नहीं, पर कल ज़रूर जीतते हैं।
तो ऐ मुसाफ़िर, कभी पीछे मत देखना, जो बीत गया, उसे बस याद समझ लेना।
तेरे क़दमों की धूल भी तेरे सफर की गवाही है, कि तू कभी रुका नहीं, यही सबसे बड़ी सच्चाई है।
- निक नागोरिया 
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